Saturday, March 5, 2016

तेरा साथ

एक सुकून सा है,
बेहद मीठा सा,
और तृप्ति का एहसास,
कोमल सा,
ये साथ तेरा।

निश्चिंत हूं मै,
अतीत के अंधेरों से,
और
भविष्य में आने वाली,
विपत से।
जो आज  अब है,
संग मेरे,
साथ तेरा,
हर डर, शिकन को,
दूर रखता, मीलों।

ये एहसास,
देता है मुझे,
एक शांत मन,
स्थिरता।
और अब,
निश्चिंत हूं मै,
गमों से।
क्यूंकि,
तेरे प्यार का कवच,
और मुस्कुराहट का,
काला टीका,
घेरे है मुझे।
परत दर परत।
       
                   ----- राजेश मीणा ' बुजेटा '

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